“बिना रेंट एग्रीमेंट के भी मकान मालिक कर सकता है किरायेदार की बेदखल की याचिका — इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम निर्णय”


“बिना रेंट एग्रीमेंट के भी मकान मालिक कर सकता है किरायेदार की बेदखल की याचिका — इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम निर्णय”




प्रयागराज  से ख़ास रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किरायेदारी विवादों को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता दी है। न्यायालय ने कहा है कि अगर मकान मालिक और किरायेदार के बीच कोई लिखित रेंट एग्रीमेंट नहीं है या उसकी जानकारी रेंट अथॉरिटी को नहीं दी गई है, तब भी मकान मालिक किरायेदार को बेदखल करने की याचिका दाखिल कर सकता है। यह फैसला उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 (UP Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021) के प्रावधानों का सही अर्थ समझाते हुए दिया गया है। 

क्या कहा गया है हाईकोर्ट ने?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनाया कि:

🔹 2021 के नियम के तहत गठित रेंट अथॉरिटी के पास अधिकार क्षेत्र है कि वह ऐसे मामलों में भी बेदखल की याचिका स्वीकार कर सकता है जहां कोई लिखित किरायेदारी समझौता (Rent Agreement) नहीं है या रेंट अथॉरिटी को जानकारी नहीं दी गई हो। 

🔹 कोर्ट ने कहा है कि यदि मकान मालिक और किरायेदार के बीच किराया संबंध में विवाद नहीं है और किरायेदारी संबंध स्पष्ट है, तो तकनीकी कारण (जैसे कि लिखित एग्रीमेंट न होना) के कारण बेदखल की याचिका ख़ारिज नहीं की जा सकती। 

🔹 न्यायालय ने यह भी रखा कि धारा 4 के अंतर्गत रेंट अथॉरिटी को जानकारी देना विधि की किश्तें हैं, परंतु उसकी अनुपालना न होने पर भी रेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में कोई कमी नहीं आती। 

क्यों हुई ये याचिकाएँ?

मामले में मकान मालिकों ने किरायेदारी विवाद के कारण रेंट अथॉरिटी तथा लघु वाद न्यायालय में बेदखल के लिए याचिकाएँ दाखिल की थीं। इसके खिलाफ किरायेदारों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई कि जब कोई लिखित रेंट एग्रीमेंट नहीं है तो ट्रिब्यूनल / रेंट अथॉरिटी के पास अधिकार क्षेत्र नहीं है। 

कोर्ट का तर्क क्या है?

🔹 कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2021 के एक्ट के प्रावधानों में लिखित एग्रीमेंट या उसकी जानकारी देने के लिए किसी कड़ाई या दंड का प्रावधान नहीं है। 

🔹 यदि किरायेदारी संबंध स्पष्ट है और मकान मालिक ने बेदखल का कारण सही ठहराया है, तो रेंट अथॉरिटी के सामने याचिका प्रस्तुत की जा सकती है। 

🔹 यह फैसला किरायेदारी मामलों में तकनीकी अड़चनों को हटाकर उचित न्याय प्रदान करने की दिशा में दृढ़ कदम माना जा रहा है। 

विशेष जानकारी — किरायेदारी विवादों में अन्य पहलू

📌 रेंट अथॉरिटी सिर्फ लिखित एग्रीमेंट तक सीमित नहीं:
कोर्ट ने दोहराया कि रेंट अथॉरिटी का अधिकार क्षेत्र सिर्फ उन मामलों तक सीमित नहीं है जहाँ लिखित समझौता जमा किया गया हो। 

📌 मकान मालिक अपनी याचिका दाखिल कर सकता है:
बिना रेंट एग्रीमेंट भी मकान मालिक किरायेदार को बेदखल करने के लिए याचिका दाखिल करने का कानूनी अधिकार रखता है। 

लोगों को क्या जानकारी चाहिए?

✔ अगर आप मकान मालिक हैं और आपका किरायेदार Rent Agreement नहीं करता है, फिर भी आपने किरायेदारी साबित कर दिया है, तो आप रेंट अथॉरिटी / ट्रिब्यूनल में बेदखल की याचिका दर्ज कर सकते हैं। 

✔ यह फैसला किरायेदारी विवादों में तकनीकी बाधाओं को हटाकर मकान मालिकों को न्याय तक पहुंचने में सहायक माना जा रहा है। 

निष्कर्ष:
इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले ने स्पष्ट किया है कि किरायेदारी के मामलों में रेंट एग्रीमेंट न होना बाधा नहीं है और मकान मालिक कानूनी प्रक्रिया के तहत किरायेदार के खिलाफ बेदखल की याचिका दाखिल कर सकता है। यह फैसला किरायेदारी कानून में तकनीकी कमियों के कारण न्याय से वंचित किए जाने के खिलाफ एक सकारात्मक दिशा है। 

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