उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर सियासत तेज, बजट में ₹55,000 करोड़ का बड़ा ऐलान
📰 पूरी खबर
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य और वेलनेस को लेकर एक ओर सरकार बड़े दावे कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष स्वास्थ्य सेवाओं की ज़मीनी हकीकत पर सवाल उठा रहा है। हाल के दिनों में स्वास्थ्य बजट और सरकारी अस्पतालों की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
📊 स्वास्थ्य बजट में बड़ा निवेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए करीब ₹55,000 करोड़ का प्रावधान किया है। सरकार का कहना है कि इस निवेश से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
मुख्य घोषणाएं:
✔ प्रदेश में अब कुल 81 मेडिकल कॉलेज
✔ लगभग 12,700 MBBS सीटें
✔ 200 नई डायग्नोस्टिक यूनिट
✔ 4,000 नई एम्बुलेंस सेवा में शामिल की जाएंगी
सरकार के अनुसार इन कदमों से ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में इलाज की सुविधा बेहतर होगी।
🏛️ स्वास्थ्य सेवाओं पर सियासी बयान, SP का हमला
इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (SP) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
SP MLC शाह आलम ने विधान परिषद में कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
➡ सरकारी अस्पतालों में 46% नर्सों की कमी
➡ 38% डॉक्टरों के पद खाली
➡ जिला अस्पतालों और CHC में बेड की भारी कमी
➡ कई PHC में पेयजल और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं
➡ MRI और अन्य जांचों में लंबा इंतजार
SP का कहना है कि घोषणाओं के बावजूद आम मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
🏥 सरकार का जवाब
सरकार ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए One District One Medical College और आयुष्मान भारत योजना जैसी योजनाओं का हवाला दिया है। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से गरीब और मध्यम वर्ग को मुफ्त और बेहतर इलाज मिल रहा है।
📌 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं इस समय एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनी हुई हैं। जहां सरकार बजट और ढांचे पर ज़ोर दे रही है, वहीं विपक्ष ज़मीनी सच्चाई सामने लाने की बात कर रहा है। आने वाला समय बताएगा कि इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचता है।
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